सुरेश वाडकर

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Saturday, February 14, 2015

ब्राक्तणवादी सरकार ने आधार मामले में सुप्रीम कोर्ट को घसीटा

ब्राक्तणवादी सरकार ने आधार मामले में सुप्रीम कोर्ट को घसीटा
   वेतन भोगियों के लिए बनाया आधार कार्ड जरूरी

नई दिल्ली/दै.मू.समाचार
देश में काबिज ब्राह्मणवादी सरकार आधार मामले में सुप्रीम कोर्ट को भी घसीट दिया है। सुप्रीम कोर्ट पर आरोप लगाते हुए मोदी सरकार ने कहा है कि विशिष्ट पहचान योजना (आधार) सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश पर ही आगे बढ़ा रही है और इस योजना को देखते हुए महाराष्ट्र में वेतन भोगियों के लिए आधार कार्ड जरूरी बनाया गया है।
वरिष्ठ दैनिक मूलनिवासी संवाददाता के अनुसार देश के शासक वर्ग यूरेशियन ब्राह्मणों की वजह से इस देश में कानून का राज खत्म हो गया है। केन्द्र में ब्राह्मणवादी सरकार आधार योजना को लागू कर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का साफ-साफ उल्लंघन कर रही है। उल्लंघन ही नहीं कर रही है बल्कि सुप्रीम कोर्ट पर आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट को भी घसीट रही है। ब्राह्मणवादी सरकार ने अपनी मनमानी से आधार योजना पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाये गये प्रतिबंध को नजर अंदाज करते हुए आधार को हर क्षेत्र में अनिवार्य बना रही है। ज्ञात हो कि सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश था कि आधार कार्ड किसी के ऊपर जबरन नहीं थोपा जायेगा और न हीं आधार को किसी क्षेत्र में अनिवार्य बनाया जायेगा। सुप्रीम कोर्ट ने आधार योजना को लेकर 23 सितम्बर 2013, 26 नवम्बर 2013 और 24 मार्च 2014 को एक के बाद एक ताबड़तोड़ तीन आदेश दिये थे कि ‘‘आधार कार्ड को सरकार के किसी योजना में अनिवार्य नहीं बनाया जायेगा’’, इसके साथ यह भी कहा था कि आधार नम्बर न होने की स्थिति में किसी को सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित नहीं किया जायेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश जारी करते हुए कहा था कि यह एक स्वैच्छिक योजना है और इसे स्वैच्छिक ही रहने दिया जाए। लेकिन देश की ब्राह्मणवादी मोदी सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को गलत साबित करते हुए आरोप लगा रही है कि केन्द्र सरकार सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेशों पर ही आधार योजना को बढ़ा रही है। यदि देखा जाए तो आधार योजना 23 सितम्बर 2013 से ही लंबित चल रहा है। इसके बाद भी ब्राह्मणवादी मोदी सरकार इस आधार योजना को पिछले दरवाजे से हर जगह अनिवार्य कर रही है। आधार कार्ड का मामला सुप्रीम कोर्ट में है। सुप्रीम कोर्ट ने अब तक जो आदेश दिये हैं उसमें यह साफ है कि इस आधार योजना को किसी क्षेत्र में अनिवार्य नहीं बनाया जा सकता, मगर मोदी इस आधार को इस स्तर तक अनिवार्य बनाते जा रहा है कि बगैर आधार के कुछ होने वाला नहीं है। इसी आधार पर महाराष्ट्र में वेतन भोगियों के लिए आधार कार्ड जरूरी बनाया गया है। वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल सुब्रह्मण्यम ने बताया कि महाराष्ट्र में वेतन भोगियों के लिए आधार जरूरी बनाया गया है। इस संबंध में सर्कुलर भी जारी किया गया है। इस पर साॅलसिटर जनरल ने ब्राह्मणवादी सरकार के बचाव को ध्यान में रखते हुए कहा कि यह सर्कुलर केन्द्र सरकार ने नहीं बल्कि महाराष्ट्र सरकार ने जारी किया है। खासकर इस बात में कोई दम नहीं है केवल लोगों को गुमराह किया जा रहा है बात को केवल समझने और विश्लेषण करने की जरूरत है। क्योंकि दोनों सरकार एक ही थाली के चट्टे-बट्टे हैं अर्थात आधार को वेतन भोगियों के लिए चाहे केन्द्र में ब्राह्मणवादी सरकार लागू करे या फिर चाहे महाराष्ट्र में ब्राह्मणवादी सरकार लागू करे दोनों बात एक ही है केवल 85 प्रतिशत मूलनिवासी समाज को समझने की जरूरत है।
ब्राह्मणवादी सरकार की यही मंशा है कि किसी तरह से आधार को अनिवार्य बनाया जाए। अगर आधार को जीवन के हर क्षेत्र में अनिवार्य बनाया जाएगा तो सभी के लिए आधार कार्ड बनवाना जरूरी हो जायेगा। इस आधार कार्ड के माध्यम से ही यूरेशियन ब्राह्मणों को अपने मकशद में कामयाबी मिलने वाली है। इस मकशद को ध्यान में रखकर आधार को अनिवार्य बनाया जा रहा है। पहले आधार केवल पहचान पत्र था फिर बाद में निर्वाचन पहचान पत्र को आधार के डाटा से जोड़ा गया, फिर आधार को रक्षा क्षेत्र से जोड़ा गया, बाद में इसी आधार को देश की सभी कम्पनियों में अनिवार्य बनाया गया, और अब इस आधार को वेतन भोगियों के लिए अनिवार्य कर दिया गया। अभी महाराष्ट्र में है धीरे-धीरे पूरे भारत में हो जायेगा। और इसी आधार कार्ड पर सभी लोगों को राशन का वितरण भी किया जायेगा। और जब देश के लोगों के लिए आधार जीवन के हर क्षेत्र में अनिवार्य हो जायेगा तभी ब्राह्मणवादी सरकार का मकशद पूरा होगा।
इस आधार को इतना महत्पूर्ण क्यों बनाया जा रहा है? इसके संबंध में कई बार देश के 85 प्रतिशत मूलनिवासी समाज को मूलनिवासी नायक जानकारी देते आ रहा है कि यह आधार कार्ड देश के 85 प्रतिशत मूलनिवासी समाज के एससी/एसटी/ओबीसी और धर्मपरिवर्तित अल्पसंख्यको के लिए बेहद खतरनाक है। क्योंकि इस आधार के जरिये देश की सुरक्षा और देश के मूलनिवासी समाज की गुप्त सूचनाएँ विदेशी खुफिया एजेंसियों को भेजी जा रही हैं जिसके वजह से इस देश की सारी गुप्त जानकारियाँ विदेशियों के पास इकट्ठा हो रही है। और इन्हीं सूचनाओं के जरिये इस देश में नरसंहार (सामूहिक हत्या) होने की पूरी सम्भावना है। क्योंकि जो आधार कार्ड बनाने वाली एजेंसियाँ हैं वो विदेशी खुफिया एजेंसियाँ है जो कि 1933 में जर्मनी में इसी आधार कार्ड के जरिए हिटलर ने यहूदियों का कत्लेआम किया था। आज वही विदेशी खुफिया एजेंसियाँ इस आधार कार्ड को बना रही हैं जिसकी वजह से इस देश की सारी गुप्त सूचनाएँ उनके पास इकट्ठा हो रही हैं। आज ब्राह्मणवादी सरकार सुप्रीम कोर्ट के पाबन्दी लगाये जाने के बाद भी आधार कार्ड को जीवन के हर क्षेत्र में अनिवार्य बना रही है जो सुप्रीम कोर्ट का उल्लंघन कर इस देश को खतरे में झोंक रही है।