सुरेश वाडकर

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Thursday, November 13, 2014

Love Story of Pandit Jawaharlal Nehru and Lady Edwina Mountbatten

भारत के सबसे ताकतवर राजनीतिक परिवार नेहरू-गांधी परिवार का इतिहास बेहद रोचक रहा है. जिसे लोग आज गांधी परिवार कहते हैं दरअसल वह नेहरू परिवार है. भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू जी इस परिवार के बेहद अहम किरदार माने जाते हैं.
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जवाहर लाल नेहरू आजाद भारत के प्रथम प्रधानमंत्री हैं. जानकार इन्हें ही भारतीय राजनीति में वंशवाद का जनक मानते हैं. जवाहर लाल नेहरू की नीतियों को कुछ लोग बेहद बेहतरीन और विश्व शांति के लिए सर्वश्रेष्ठ मानते हैं तो कुछ उनकी नीतियों में उनके डर पर प्रकाश डालते हैं. एक महान और दार्शनिक इतिहास पुरुष के जीवन की कई बातें आपने पढ़ी होंगी लेकिन जवाहर लाल नेहरू की जिंदगी से जुड़ा एक ऐसा अध्याय भी है जिस पर बहुत कम लोग प्रकाश डालते हैं और वह है उनकी लव स्टोरी का अध्याय.

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आजादी की लड़ाई के अंतिम पड़ाव पर जवाहरलाल नेहरू और लेडी मांउटबेटन के बीच रिश्तों की गर्माहट सभी ने महसूस की थी. कई लोग मानते हैं कि इस लव स्टोरी ने भारत के इतिहास को प्रभावित किया है. खुद लेडी माउंटबेटन की बेटी पामेला ने अपनी एक किताब में लिखा है कि दोनों के बीच रुहानी संबंध था. साथ ही वह यह भी कहती हैं कि कई बार मेरी मौजूदगी उन दोनों के लिए असहजता की स्थिति पैदा कर देती थी. दोनों घंटों तक कमरे में अकेले रहते थे. लॉर्ड माउंटबेटन भी दोनों को अकेला छोड़ देते थे. अब खुद लॉर्ड माउंटबेटन अपनी पत्नी को एक गैर के साथ खुला क्यूं छोड़ते थे यह एक गुप्त राज है. कई लोग मानते हैं कि ऐसा कर लॉर्ड माउंटबेटन जवाहरलाल नेहरू को अपने वश में करना चाहते थे ताकि अंग्रेजों का शासन भारत पर और अधिक समय तक चल सके.

ऐसा नहीं है कि लेडी माउंटबेटन और जवाहरलाल नेहरू के बीच रिश्तों की सिर्फ अफवाहें थीं. जो लोग इन खबरों को अफवाह मानते हैं उन्हें यह पता होना चाहिए कि धुंआ वहीं उठता है जहां आग लगती है.

इतिहासकार मानते हैं कि नेहरू और एडविना के बीच प्रेम प्रत्यक्ष तौर पर राजनीतिक रूप से विस्फोटक था. यह प्रेम प्रसंग अंग्रेजों के राज छोड़ने की प्रक्रिया में बाधा डाल सकता था. जवाहरलाल नेहरू अगर लेडी माउंटबेटन के साथ रिश्तों में अधिक रुचि दिखाते तो हो सकता था अंग्रेज अपनी कूटनीति से उन्हें फंसा सकते थे. वैसे भी जवाहरलाल नेहरू विदेश से पढ़े-लिखे थे और उन्हें विलायती रहन-सहन पसंद था.

साथ ही इतिहासकारों की नजर में बेशक लेडी माउंटबेटन और नेहरू जी के रिश्तों के बावजूद अंग्रेज भारत में अधिक समय तक नहीं रह सके लेकिन जाते-जाते उन्होंने भारत को पूरी तरह बांट दिया. पाकिस्तान अलग कर दिया, कश्मीर का मुद्दा दे गए उधर नेहरू जी की विचारधारा को इतना अधिक नरम कर दिया कि वह समय आने पर सख्त रवैया अपना ही नहीं सके.
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Vyarawalla12-12461Jawaharlal Nehru Exposed
जवाहर लाल नेहरू की आलोचना सिर्फ लेडी माउंटबेटन के साथ रिश्तों के लिए ही नहीं बल्कि उनकी विलासिता की आदत की वजह से भी होती है. एक बार डॉ. राममनोहर लोहिया ने संसद में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के ऐशो आराम पर रोजाना होने वाले 25 हजार रुपये के खर्च को प्रमुखता से उठाते हुए कहा था कि भारत की जनता जहां साढ़े तीन आना पर जीवन यापन कर रही है उसी देश का प्रधानमंत्री इतना भारी भरकम खर्च कैसे कर सकता है. इसे तीन आने की बहस कहते हैं. लोहिया जी ने सरकारी तंत्र के मुगलिया ठाठ-बाट की निंदा इतने कड़े शब्दों में की थी कि सारा तंत्र भर्राने लगा था. साथ ही कई लोग नेहरू जी को ही कश्मीर और चीन के मुद्दे पर हुई विफलता का कारण भी मानते हैं.

Children Day 2012: बाल दिवस
लेकिन पंडित जवाहर लाल नेहरू को तमाम आलोचनाओं और आरोपों के बाद भी अगर चाचा ने नाम से संबोधित किया जाता है तो उसके पीछे वजह है उनका बच्चों के प्रति लगाव और स्नेह. सभी जानते हैं कि पंडित नेहरू बच्चों से कितना प्रेम करते थे. बच्चों के प्रति उनके स्नेह की वजह से ही हर साल 14 नंवबर को उनके जन्मदिन को बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है.