सुरेश वाडकर

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Monday, November 10, 2014

'गॉड पार्टिकल ' के रहस्य से पर्दा हटा

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'गॉड पार्टिकल ' के रहस्य से पर्दा हटा

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जिनीवा।। जिनीवा में साइंटिस्टों ने बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि उन्‍हें प्रयोग के दौरान नए कण मिले, जिनकी कई खूबियां हिग्‍स बोसोन से मिलती हैं। उन्‍होंने बताया कि वैज्ञानिक नए कणों के विश्‍लेषण में जुटे हैं। हालांकि उन्‍होंने यह भी कहा कि इन नए कणों के कई गुण हिग्‍स बोसोन थ्‍योरी से मेल नहीं खाते हैं। फिर भी इसे ब्रह्मांड के रहस्‍य खोलने की दिशा में एक अहम कामयाबी माना जा रहा है।

पढ़ें: गॉड पार्टिकल की पूरी कहानी

वहीं, एटलस एक्सपेरिमेंट प्रोजेक्ट पर काम कर रहे ब्रिटिश भौतिकशास्त्री ब्रॉयन कॉक्स के मुताबिक सीएमएस ने एक नया बोसोन खोजा है जो कि स्टेंडर्ड हिग्स बोसोन की तरह ही है। हालांकि कॉक्स ने यह भी कहा कि अधिक जानकारी के लिए हिग्स सिग्नल को प्रत्येक इवेंट में 30- प्रोटान-प्रोटान कॉलिजन कराना पड़ेगा जो कि काफी मुश्किल होगा क्योंकि यह एटलस प्रोजेक्ट की डिजाइन क्षमता के बाहर की बात है।

भारतीय वैज्ञानिक के नाम पर दिया नाम बोसोन
बोसोन परमाणु में अब तक ज्ञात सबसे छोटे कण हैं। परमाणु की बनावट में न्यूक्लियस के अंदर प्रोटॉन तक पहुंच कर भी साइंटिस्ट दुनिया की बनावट का रहस्य नहीं भेद पाए। इसके बाद प्रोटॉन की बनावट को समझने की प्रक्रिया में एक खास कण का आभास हुआ जिसे बोसोन नाम दिया गया। खास बात यह कि बोसोन नाम भारतीय वैज्ञानिक सत्येंद्र नाथ बोस के नाम से लिया गया था जो कि आइंस्टीन के समकालीन थे।

1965 में पीटर हिग्स ने हिग्स बोसोन या गॉड पार्टिकल का आइडिया पेश किया। जिसमें उन्होंने बताया कि गॉड पार्टिकल वह कण है जो मैटर को मास (द्रव्यमान) प्रदान करता है। उनकी थ्योरी में हिग्स बोसोन ऐसा मूल कण था , जिसका एक फील्ड था , जो यूनिवर्स में हर कहीं मौजूद था। जब कोई दूसरा कण इस फील्ड से गुजरता तो रेजिस्टेंस या रुकावट का सामना करता, जैसे कि कोई भी चीज पानी या हवा से गुजरते हुए करती है। जितना ज्यादा रेजिस्टेंस , उतना ज्यादा मास। स्टैंडर्ड मॉडल हिग्स बोसोन से मजबूत हो जाता था, लेकिन उसके होने का एक्सपेरिमेंटल सबूत चाहिए था। सर्न के ताजा प्रयोगों के जरिए वैज्ञानिकों ने इस कण को पाया है।

सदी की सबसे बड़ी खोज?
इसे सदी की सबसे बड़ी खोज कहा जा रहा है। समझा जाता है कि इन कणों के विश्लेषण के जरिए वैज्ञानिक सृष्टि का रहस्य सुलझा लेंगे। यह भी कहा जा रहा है कि एक बार बोसोन का रहस्य पूरी तरह समझ में आ जाए तो उसके बाद कोई भी बीमारी लाइलाज नहीं होगी।

सर्न की खोज पर प्रतिक्रिया देते हुए वैज्ञानिक पीटर हिग्स ने कहा, 'सर्न के वैज्ञानिक आज के नतीजों के लिए बधाई के पात्र हैं, यह यहां तक पहुंचने के लिए लार्ज हेड्रान कोलाइडर और अन्य प्रयोगों के प्रयासों का ही नतीजा है। मैं नतीजों की रफ्तार देखकर हैरान हूं। खोज की रफ्तार शोधकर्ताओं की विशेषज्ञता और मौजूदा तकनीक की क्षमताओं का प्रमाण है। मैंने कभी उम्मीद नहीं की थी कि मेरे जीवनकाल में ही ऐसा होगा।'

इससे पहले, फ्रांस और स्विटजरलैंड की सीमा पर जिनीवा में बनी सबसे बड़ी प्रयोगशाला में दुनिया भर के बड़े वैज्ञानिकों को निमंत्रित किया गया था।

यूरोपियन ऑर्गनाइजेशन फॉर न्यूक्लियर रिसर्च (सर्न) के जिनीवा के पास स्थित फिजिक्स रिसर्च सेंटर के साइंटिस्टों ने बताया कि गॉड पार्टिकल का पता तब चला, जब एटलस और सीएमएस प्रयोगों से जुड़े साइंटिस्टों ने लार्ज हैड्रोन कॉलाइडर को तेज स्पीड में चलाकर कई कणों को आपस में टकराए।

इस दौरान बोसोन के चमकते हुए अंश सामने आए, लेकिन उन्हें पकड़ना मुमकिन नहीं था। सीएमएस से जुड़े एक साइंटिस्ट ने बताया, ये दोनों ही प्रयोग एक ही मास लेवल पर गॉड पार्टिकलों के वजूद का संकेत दे रहे हैं।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर हिग्स बोसोन के वजूद की पुष्टि होती है, तो यह ब्रह्मांड के सभी मूलभूत तत्वों के रहस्यों को सामने लाने की शुरुआत होगी और यह पिछले 100 सालों में सबसे अहम खोज कही जाएगी।